सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप के व्यापक टैरिफ लगाने के अधिकार पर सवाल उठाए
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सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप के व्यापक टैरिफ लगाने के अधिकार पर सवाल उठाए

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम के तहत राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा एकतरफा टैरिफ लगाने पर संदेह व्यक्त किया, और स्पष्ट कांग्रेस की मंजूरी के बिना कार्यकारी अधिकार की सीमा पर सवाल उठाए।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ की वैधता पर विचार करने के लिए बैठक की। न्यायाधीशों ने यह जांच की कि क्या यह अधिनियम राष्ट्रपति को बिना स्पष्ट कांग्रेस की अनुमति के इतने व्यापक शुल्क लगाने का अधिकार देता है।

मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बताया कि यह कानून स्पष्ट रूप से टैरिफ का उल्लेख नहीं करता है और यह जोर दिया कि कर लगाना पारंपरिक रूप से कांग्रेस का मूल अधिकार रहा है। न्यायाधीश नील गोरसच ने कार्यकारी शक्ति के संभावित अतिक्रमण पर चिंता व्यक्त की, यह सवाल उठाते हुए कि क्या कांग्रेस विदेशी व्यापार को नियंत्रित करने की पूरी जिम्मेदारी राष्ट्रपति को सौंप सकती है।

न्यायाधीश ब्रेट कैवनaugh ने हालांकि प्रशासन के पक्ष में अधिक सहानुभूति दिखाई, यह नोट करते हुए कि कांग्रेस ने आपात स्थितियों से निपटने के लिए राष्ट्रपति को विभिन्न उपकरण प्रदान किए हैं। उन्होंने सवाल किया कि कानून व्यापार प्रतिबंधों की अनुमति क्यों देता है लेकिन संभवतः टैरिफ को बाहर क्यों रखता है, जो कि एक अधिक संतुलित प्रतिक्रिया माना जा सकता है।

यह मामला राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा इस वर्ष की शुरुआत में लागू किए गए दो टैरिफ सेटों पर केंद्रित है। पहला लगभग सभी अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों पर 10% की आधार दर लगाता है, जबकि दूसरा चीन, कनाडा और मेक्सिको सहित विशिष्ट देशों को लक्षित करता है, व्यापार घाटे और ड्रग तस्करी के मुद्दों का हवाला देते हुए। निचली अदालतों ने पहले प्रशासन के खिलाफ फैसला दिया था, यह कहते हुए कि IEEPA ऐसे व्यापक कार्यों को अधिकृत नहीं करता।

सॉलिसिटर जनरल डी. जॉन सॉयर ने तर्क दिया कि ये टैरिफ राष्ट्रपति के राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश मामलों पर अधिकार का वैध प्रयोग हैं, और इन्हें अमान्य करने से देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। इसके विपरीत, टैरिफ के खिलाफ चुनौती देने वाले व्यवसायों का प्रतिनिधित्व करने वाले नील कट्याल ने कहा कि टैरिफ कर हैं, जो कांग्रेस को प्रदान किया गया अधिकार है, और चेतावनी दी कि ऐसे कार्यकारी कदमों को अनुमति देने से राष्ट्रपति के अधिकारों का अनियंत्रित विस्तार हो सकता है।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय कार्यकारी और विधायी शाखाओं के बीच शक्ति के संतुलन के लिए महत्वपूर्ण प्रभाव डालने की उम्मीद है, विशेष रूप से व्यापार और आर्थिक नीति के संदर्भ में।

स्रोत

CBS News

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The Supreme Court convened on Wednesday to deliberate on the legality of President Trump's extensive tariffs imposed under the International Emergency Economic Powers Act (IEEPA).

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The justices scrutinized whether the Act grants the president the authority to levy such broad duties without explicit congressional authorization.

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Chief Justice John Roberts highlighted that the statute does not explicitly mention tariffs and emphasized that imposing taxes has traditionally been a core power of Congress.

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Justice Neil Gorsuch raised concerns about the potential overreach of executive power, questioning whether Congress could delegate all responsibility to regulate foreign commerce to the president.

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Justice Brett Kavanaugh, however, appeared more sympathetic to the administration's stance, noting that Congress had provided the president with various tools to address emergencies.

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The case centers on two sets of tariffs introduced by President Trump earlier this year.

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Lower courts have previously ruled against the administration, stating that IEEPA does not authorize such sweeping actions.

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Solicitor General D. John Sauer argued that the tariffs are a legitimate exercise of the president's authority over national security and foreign affairs.

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