सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के टैरिफ की वैधता की समीक्षा करेगा
सुप्रीम कोर्ट पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम के तहत लगाए गए टैरिफ की वैधता पर बहस सुनने के लिए तैयार है।
सुप्रीम कोर्ट इस बुधवार को पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ की वैधता पर मौखिक बहस सुनने के लिए निर्धारित है। यह मामला व्यापार नीति में राष्ट्रपति की शक्तियों की महत्वपूर्ण जांच को चिह्नित करता है।
अप्रैल 2025 में, राष्ट्रपति ट्रंप ने "लिबरेशन डे" टैरिफ की घोषणा की, जिसमें कई वैश्विक आयातों पर न्यूनतम 10% शुल्क लगाया गया, और कनाडा, मैक्सिको, और चीन जैसे देशों के लिए अधिक दरें निर्धारित की गईं। उन्होंने इन टैरिफ को IEEPA के तहत राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर न्यायसंगत ठहराया, व्यापार असंतुलन और राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए। हालांकि, अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार न्यायालय ने फैसला दिया कि IEEPA राष्ट्रपति को इतने व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता, जिससे व्यवसायों और राज्यों द्वारा कानूनी चुनौतियां सामने आईं।
संघीय सर्किट के अमेरिकी अपीलीय न्यायालय ने इस निर्णय को बरकरार रखा, यह कहते हुए कि राष्ट्रपति ट्रंप ने IEEPA के तहत अपनी सीमा से परे कार्य किया। अदालत ने जोर दिया कि टैरिफ लगाने का अधिकार कांग्रेस के पास है, और राष्ट्रपति की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के मेजर क्वेश्चन सिद्धांत के तहत सवाल उठाती है।
ट्रंप प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिसने मामले को शीघ्र सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने चेतावनी दी कि यदि टैरिफ को अवैध घोषित किया जाता है, तो सरकार को 750 बिलियन से 1 ट्रिलियन डॉलर के बीच धनवापसी करनी पड़ सकती है, जो ट्रेजरी पर भारी प्रभाव डालेगा। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञ धनवापसी की स्वचालित आवश्यकता को लेकर संशय व्यक्त करते हैं, कानूनी जटिलताओं और प्रक्रियात्मक बाधाओं का हवाला देते हुए।
पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप, जिन्होंने मौखिक बहस में भाग लेने पर विचार किया था, ने इसे एक ध्यान भटकाने वाले तत्व से बचने के लिए न करने का निर्णय लिया। उन्होंने इस फैसले के राष्ट्रीय महत्व पर जोर दिया, अपने टैरिफ नीतियों का बचाव करते हुए कहा कि ये राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं और व्यापार संबंधों को पुनर्संतुलित करने के लिए जरूरी थे।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय व्यापार नीति में राष्ट्रपति की शक्तियों की सीमा के लिए महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों तथा अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है।
स्रोत
The New York Timesतथ्य जाँच
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