नौवीं सर्किट कोर्ट ने कानूनी चुनौतियों के बीच पोर्टलैंड में नेशनल गार्ड की तैनाती की अनुमति दी
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नौवीं सर्किट कोर्ट ने कानूनी चुनौतियों के बीच पोर्टलैंड में नेशनल गार्ड की तैनाती की अनुमति दी

सारांश

एक विभाजित संघीय अपीलीय न्यायालय ने ट्रम्प प्रशासन को ओरेगन नेशनल गार्ड को पोर्टलैंड में तैनात करने की अनुमति दी है, जिससे पहले के एक अस्थायी निषेधाज्ञा आदेश को पलट दिया गया और राज्य अधिकारियों द्वारा तत्काल अपील की गई।

संयुक्त राज्य अमेरिका के नौवीं सर्किट अपीलीय न्यायालय के एक विभाजित पैनल ने फैसला सुनाया है कि ट्रम्प प्रशासन ओरेगन नेशनल गार्ड को पोर्टलैंड में तैनात कर सकता है, जिससे निचली अदालत द्वारा जारी एक अस्थायी निषेधाज्ञा आदेश को पलट दिया गया। बहुमत की राय में कहा गया, "इस प्रारंभिक चरण में रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद, हम निष्कर्ष निकालते हैं कि राष्ट्रपति ने अपने सांविधिक अधिकार का विधिवत प्रयोग किया है।"

इस फैसले के बाद राज्य अधिकारियों ने तुरंत अपील की। ओरेगन के अटॉर्नी जनरल डैन रेफील्ड ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "आज का फैसला, यदि कायम रहता है, तो राष्ट्रपति को लगभग बिना किसी औचित्य के ओरेगन के सैनिकों को हमारी सड़कों पर तैनात करने का एकतरफा अधिकार देगा। हम अमेरिका में एक खतरनाक रास्ते पर हैं।"

यह निर्णय राष्ट्रीय गार्ड सैनिकों के संघीयकरण और तैनाती को लेकर चल रहे कानूनी विवादों के बीच आया है। 16 अक्टूबर को, एक संघीय अपीलीय न्यायालय ने इलिनॉय में एक जिला न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा था, जिसने वहां राष्ट्रपति के राष्ट्रीय गार्ड के संघीयकरण और तैनाती को अस्थायी रूप से रोका था। ट्रम्प प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।

पोर्टलैंड की स्थिति इन विवादों का केंद्र रही है। ट्रम्प प्रशासन का तर्क है कि तैनाती आवश्यक है ताकि स्थानीय नेताओं द्वारा संबोधित न किए गए हिंसक दंगों के बाद संघीय संपत्तियों और कर्मियों की सुरक्षा की जा सके। हालांकि, स्थानीय और राज्य अधिकारी, निवासी और पत्रकार इस वर्णन का विरोध करते हुए कहते हैं कि प्रदर्शन मुख्य रूप से शांतिपूर्ण थे।

नौवीं सर्किट का फैसला यू.एस. जिला न्यायाधीश करिन इमर्गुट द्वारा इस महीने की शुरुआत में जारी दो अस्थायी निषेधाज्ञा आदेशों में से एक पर लागू होता है। दूसरा निषेधाज्ञा आदेश, जो किसी भी राज्य से संघीयीकृत राष्ट्रीय गार्ड सदस्यों की ओरेगन में तैनाती को रोकता है, अभी भी प्रभावी है। न्याय विभाग ने अपीलीय न्यायालय के फैसले के मद्देनजर न्यायाधीश इमर्गुट से इस दूसरे निषेधाज्ञा आदेश को समाप्त करने का अनुरोध किया है।

जैसे-जैसे कानूनी कार्यवाही जारी है, नौवीं सर्किट के फैसले का पोर्टलैंड में तत्काल प्रभाव अनिश्चित बना हुआ है। संयुक्त राज्य उत्तरी कमांड के एक प्रवक्ता ने कहा कि फैसले के बावजूद, पोर्टलैंड में सैनिक "इस समय कोई संचालनात्मक गतिविधि नहीं कर रहे हैं।"

यह एक विकसित हो रही कहानी है, और कानूनी स्थिति के बदलने के साथ आगे अपडेट्स की उम्मीद है।

तथ्य जाँच

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A divided panel of the U.S. Court of Appeals for the 9th Circuit has ruled that the Trump administration can deploy the Oregon National Guard to Portland, overturning a temporary restraining order issued by a lower court.

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The majority opinion stated, 'After considering the record at this preliminary stage, we conclude that it is likely that the President lawfully exercised his statutory authority.'

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Oregon Attorney General Dan Rayfield expressed concern, stating, 'Today's ruling, if allowed to stand, would give the president unilateral power to put Oregon soldiers on our streets with almost no justification. We are on a dangerous path in America.'

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The ruling comes amid ongoing legal battles over the federalization and deployment of National Guard troops to U.S. cities.

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On October 16, a federal appeals court upheld a district court ruling in Illinois, temporarily blocking the president's federalization and deployment of the National Guard there.

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The Trump administration has asked the Supreme Court to intervene.

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The 9th Circuit's decision applies to one of two temporary restraining orders issued by U.S. District Judge Karin Immergut earlier this month.

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A spokesperson for United States Northern Command stated that, despite the ruling, soldiers in Portland 'are not conducting any operational activities at this time.'

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