ट्रम्प प्रशासन ने जन्मसिद्ध नागरिकता आदेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
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ट्रम्प प्रशासन ने जन्मसिद्ध नागरिकता आदेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

सारांश

ट्रम्प प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट से जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने वाले कार्यकारी आदेश को बरकरार रखने का अनुरोध किया है, जो निचली अदालतों के उन फैसलों को चुनौती देता है जिन्होंने इसके क्रियान्वयन को रोका है।

ट्रम्प प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट से जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने वाले एक कार्यकारी आदेश को बरकरार रखने का अनुरोध किया है, यह दावा करते हुए कि जिन माता-पिता का अमेरिका में अवैध या अस्थायी रूप से प्रवास है, उनके यहां जन्मे बच्चों को अमेरिकी नागरिकता नहीं दी जानी चाहिए। यह अपील उन निचली अदालतों के फैसलों के बाद आई है जिन्होंने इस आदेश के क्रियान्वयन को रोका है।

यह कार्यकारी आदेश, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 20 जनवरी 2025 को हस्ताक्षरित किया था, 14वें संशोधन के नागरिकता खंड की पुनर्व्याख्या करने का प्रयास करता है, जो परंपरागत रूप से लगभग सभी व्यक्तियों को अमेरिकी भूमि पर जन्म लेने पर नागरिकता प्रदान करता है। प्रशासन का तर्क है कि यह संशोधन अमेरिका में जन्मे सभी लोगों को सार्वभौमिक रूप से नागरिकता नहीं देता।

इस कार्यकारी आदेश के खिलाफ कई राज्यों और नागरिक अधिकार संगठनों ने मुकदमे दायर किए हैं। वाशिंगटन, मैरीलैंड और मैसाचुसेट्स के संघीय न्यायाधीशों ने राष्ट्रीय स्तर पर निषेधाज्ञाएँ जारी की हैं, जिससे आदेश लागू नहीं हो पा रहा है। उदाहरण के लिए, सिएटल के यू.एस. डिस्ट्रिक्ट जज जॉन कॉफेनौर ने इस आदेश को "स्पष्ट रूप से असंवैधानिक" बताया और इसके प्रवर्तन को अस्थायी रूप से रोक दिया।

न्याय विभाग का तर्क है कि ये राष्ट्रीय निषेधाज्ञाएँ न्यायिक अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं और कार्यकारी शाखा की नीतियों को लागू करने की क्षमता को प्रभावित करती हैं। कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल सारा हैरिस ने कहा कि ऐसी निषेधाज्ञाएँ "अदालतों की शक्तियों पर संवैधानिक सीमाओं का उल्लंघन" करती हैं और सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि प्रशासन को उन व्यक्तियों पर आदेश लागू करने की अनुमति दी जाए जो सीधे मुकदमों में शामिल नहीं हैं।

कार्यकारी आदेश के विरोधी यह मानते हैं कि यह संविधान के 14वें संशोधन का उल्लंघन करता है। अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन के वकील कोडी वॉफसी ने जोर देकर कहा कि यह आदेश "अवैध है, पूर्ण रूप से," और इसके प्रवर्तन को रोकने के प्रयास जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार है कि वह इस मामले को सुनेगा या नहीं, जिसके तर्क आने वाले महीनों में हो सकते हैं। इस फैसले का अमेरिकी जन्मसिद्ध नागरिकता की व्याख्या पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।

स्रोत

AP News

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Confirmed

The Trump administration has petitioned the Supreme Court to uphold an executive order that restricts birthright citizenship.

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Confirmed

The executive order, signed by President Donald Trump on January 20, 2025, aims to reinterpret the 14th Amendment's Citizenship Clause.

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Partly Confirmed

Federal judges in Washington, Maryland, and Massachusetts have issued nationwide injunctions, preventing the order from taking effect.

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Confirmed

U.S. District Judge John Coughenour in Seattle described the order as 'blatantly unconstitutional' and temporarily blocked its enforcement.

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Unverified

Acting Solicitor General Sarah Harris stated that such injunctions 'transgress constitutional limits on courts' powers' and urged the Supreme Court to allow the administration to implement the order for individuals not directly involved in the lawsuits.

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Confirmed

Cody Wofsy, an attorney with the American Civil Liberties Union, emphasized that the order is 'illegal, full stop,' and vowed to continue efforts to prevent its enforcement.

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Confirmed

The Supreme Court's decision on whether to hear the case is pending, with arguments potentially taking place in the coming months.

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