पोप लियो XIV ने राजनयिकों को संबोधित करते हुए अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के क्षरण की निंदा की
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पोप लियो XIV ने राजनयिकों को संबोधित करते हुए अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के क्षरण की निंदा की

सारांश

पोप लियो XIV ने वेटिकन में वैश्विक राजनयिकों को संबोधित करते हुए सैन्य आक्रमण की पुनरुत्थान और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के कमजोर होने की कड़ी आलोचना की।

पोप लियो XIV ने वेटिकन के एपोस्टोलिक पैलेस में राजनयिकों को संबोधित करते हुए सैन्य आक्रमण की पुनरुत्थान और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के क्षरण को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कैरिबियन सागर और अमेरिकी प्रशांत तट जैसे क्षेत्रों में बढ़ती तनावों को उजागर किया, वेनेजुएला के लोगों की इच्छा का सम्मान करने और देश में स्थिरता बहाल करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

पोप ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित सिद्धांत, जो राष्ट्रों को दूसरों की सीमाओं का उल्लंघन करने के लिए बल प्रयोग करने से रोकता है, पूरी तरह से कमजोर हो गया है। उन्होंने बहुपक्षवाद के कमजोर होने पर अफसोस जताया और युद्धरत पक्षों की महत्वाकांक्षाओं पर अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के प्रभुत्व को आवश्यक बताया।

यह संबोधन हाल ही में हुए अमेरिकी सैन्य अभियान के बाद आया है, जिसने वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किया, साथ ही रूस के यूक्रेन युद्ध जैसे चल रहे संघर्षों के बीच। पोप लियो XIV के विचार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से भिन्न हैं, जिन्होंने हाल ही में कहा था कि उन्हें केवल अपनी नैतिकता द्वारा सीमित महसूस होता है, और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून तथा द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के व्यवस्था को खारिज किया।

अपने भाषण में, पोप ने गर्भपात, सरोगेसी और युथनेशिया जैसी प्रथाओं की भी निंदा की, और स्वास्थ्य कर्मियों के विवेकाधिकार के अधिकार की रक्षा की। उन्होंने पश्चिम में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तेजी से सिकुड़ने और एक नए ऑरवेलियन शैली के भाषा के उदय के खिलाफ चेतावनी दी, जो प्रचलित विचारधाराओं के अनुरूप न होने वालों को बाहर करता है।

वर्तमान समय और पाँचवीं सदी के बीच समानताएं खींचते हुए, पोप लियो XIV ने सेंट ऑगस्टीन की 'द सिटी ऑफ गॉड' का उल्लेख किया, जिसमें बताया गया कि उस समय भी समाज प्रवासन, बदलते विश्व व्यवस्था और युग परिवर्तन से प्रभावित था। उन्होंने प्रवासियों के प्रति व्यवहार को लेकर अपनी चिंताएं दोहराईं और सरकारों को अपराध और मानव तस्करी के खिलाफ लड़ाई को प्रवासियों और शरणार्थियों की गरिमा को कमजोर करने के बहाने के रूप में इस्तेमाल करने से सावधान रहने को कहा।

यह संबोधन पोप लियो XIV की पहली बड़ी विदेश नीति सगाई को दर्शाता है, जो बढ़ती वैश्विक तनावों के बीच शांति, धार्मिक स्वतंत्रता और नैतिकता के प्रति उनकी चिंताओं को उजागर करता है।

स्रोत

CNN

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Pope Leo XIV addressed diplomats at the Vatican's Apostolic Palace, expressing deep concern over the resurgence of military aggression and the erosion of international borders.

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Pope Leo XIV highlighted escalating tensions in regions such as the Caribbean Sea and the American Pacific coast, emphasizing the need to respect the will of the Venezuelan people and restore stability in the country.

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Pope Leo XIV stated that the principle established after World War II, which prohibits nations from using force to violate others' borders, has been completely undermined.

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Pope Leo XIV condemned practices like abortion, surrogacy, and euthanasia, defending the right of conscientious objection by healthcare professionals.

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