स्वतंत्र एजेंसियों पर राष्ट्रपति की अधिकारिता पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला
यू.एस. सर्वोच्च न्यायालय एक ऐसे मामले की सुनवाई करने जा रहा है जो राष्ट्रपति को बिना कारण स्वतंत्र संघीय एजेंसियों के नेताओं को हटाने के अधिकार को चुनौती देता है, जिससे 1935 के एक पूर्वनिर्णय को पलटा जा सकता है।
यू.एस. सर्वोच्च न्यायालय एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई करने जा रहा है जो राष्ट्रपति की स्वतंत्र संघीय एजेंसियों के नेताओं को बिना कारण हटाने की अधिकारिता से संबंधित है। यह मामला पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस प्रयास पर केंद्रित है जिसमें उन्होंने फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) की सदस्य रेबेका स्लॉटर को उनके कार्यकाल 2029 के समाप्त होने से पहले हटाने की कोशिश की।
यह विवाद 1935 के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय Humphrey's Executor v. United States को चुनौती देता है, जिसने यह स्थापित किया था कि कांग्रेस राष्ट्रपति के स्वतंत्र एजेंसियों के अधिकारियों को हटाने के अधिकार को सीमित कर सकती है। ट्रम्प की कानूनी टीम का तर्क है कि ऐसी सीमाएं संविधान द्वारा राष्ट्रपति को प्रदान की गई कार्यकारी शक्ति का उल्लंघन हैं।
निचली अदालतों ने पहले ट्रम्प के कार्यों के खिलाफ निर्णय दिया है, यह कहते हुए कि आयोग के सदस्यों को केवल विशेष कारणों जैसे अक्षमता, कर्तव्य की उपेक्षा, या दुराचार के लिए हटाया जा सकता है।
इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय दो दर्जन से अधिक संघीय एजेंसियों की संरचना और स्वतंत्रता पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है, जिनमें फेडरल रिजर्व और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन शामिल हैं। राष्ट्रपति के पक्ष में फैसला आने पर भविष्य की व्यवस्थाओं को इन संस्थाओं पर अधिक नियंत्रण मिल सकता है, जिससे उनकी पारंपरिक द्विदलीय और स्वतंत्र प्रकृति में बदलाव आ सकता है।
कानूनी विशेषज्ञ इस मामले पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं, क्योंकि यह कार्यकारी शाखा और स्वतंत्र संघीय एजेंसियों के बीच सत्ता के संतुलन को पुनर्परिभाषित कर सकता है। न्यायालय का फैसला जून 2026 तक आने की उम्मीद है।
स्रोत
ABC Newsपहली बार यहां रिपोर्ट किया गया
तथ्य जाँच
लेख के तथ्यों की जाँच करें बाहरी स्रोतों और डेटाबेस का उपयोग करके।