33 वर्षों के विराम के बाद अमेरिका फिर से परमाणु हथियार परीक्षण करेगा
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में परमाणु हथियार परीक्षण तुरंत पुनः शुरू करने का आदेश दिया है, जिससे 33 वर्षों का विराम समाप्त हो गया है और वैश्विक सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सेना को तुरंत परमाणु हथियार परीक्षण पुनः शुरू करने का निर्देश दिया है, जिससे 33 वर्षों का moratorium समाप्त हो गया है। यह निर्णय वैश्विक तनावों में वृद्धि और अन्य देशों द्वारा परमाणु शस्त्रागार में प्रगति के बीच आया है।
अमेरिका ने आखिरी बार 1992 में परमाणु परीक्षण किया था। तब से, यह अपने परमाणु भंडार की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए कंप्यूटर सिमुलेशन और अन्य तरीकों पर निर्भर रहा है। परीक्षण पुनः शुरू करना अमेरिकी परमाणु नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है।
रूस ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका परीक्षण पुनः शुरू करता है तो वह भी परमाणु परीक्षण करने के लिए तैयार है। सितंबर 2024 में, रूस के परमाणु परीक्षण स्थल के प्रमुख ने कहा था कि उनका केंद्र "किसी भी समय" परीक्षण करने के लिए तैयार है यदि आदेश दिया जाए।
चीन भी अपने परमाणु क्षमताओं का विस्तार कर रहा है, जिसमें नए मिसाइल साइलो का निर्माण शामिल है। जून 2024 में, अमेरिका और चीन ने पांच वर्षों में पहली बार अनौपचारिक परमाणु हथियार वार्ता की, जिसमें ताइवान और अन्य मुद्दों पर चिंता व्यक्त की गई।
परीक्षण पुनः शुरू करने के निर्णय ने गैर-प्रसार विशेषज्ञों में चिंता पैदा कर दी है। वे चेतावनी देते हैं कि यह एक नए हथियार दौड़ को जन्म दे सकता है और परमाणु हथियार प्रसार को सीमित करने के दशकों के प्रयासों को कमजोर कर सकता है। 1996 में हस्ताक्षरित व्यापक परमाणु परीक्षण निषेध संधि (Comprehensive Nuclear Test-Ban Treaty) सभी परमाणु विस्फोटों पर प्रतिबंध लगाने का लक्ष्य रखती है, लेकिन इसे सभी परमाणु सक्षम देशों ने अनुमोदित नहीं किया है।
परमाणु परीक्षण पुनः शुरू करने से वैश्विक सुरक्षा और कूटनीतिक संबंधों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना है, क्योंकि अन्य देश भी अपने परीक्षण कर सकते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्थिरता और अधिक अस्थिर हो सकती है।
स्रोत
AP Newsतथ्य जाँच
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