इजरायली बलों ने गाजा की ओर जा रही सहायता नौकाओं को रोका, सैकड़ों कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया
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इजरायली बलों ने गाजा की ओर जा रही सहायता नौकाओं को रोका, सैकड़ों कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया

सारांश

इजरायली सेना ने गाजा की ओर जा रही सहायता नौकाओं को रोका और 450 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया, जिनमें स्वीडिश जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग भी शामिल हैं, जिससे विश्वभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।

इजरायली सैन्य बलों ने ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला को रोका है, जो लगभग 40 नावों का एक काफिला था और गाजा को मानवीय सहायता पहुंचा रहा था। इस कार्रवाई में 450 से अधिक अंतरराष्ट्रीय कार्यकर्ता हिरासत में लिए गए, जिनमें स्वीडिश जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग भी शामिल हैं। यह फ्लोटिला गाजा पर इजरायल की लंबे समय से जारी नौसैनिक नाकेबंदी को चुनौती देने के उद्देश्य से आवश्यक आपूर्ति जैसे भोजन और दवाइयां पहुंचाने का प्रयास कर रहा था।

यह रोकथाम 2 अक्टूबर 2025 को हुई, जब इजरायली सैनिकों ने नावों पर चढ़कर कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। इस ऑपरेशन की वीडियो फुटेज ने यूरोप, लैटिन अमेरिका और एशिया में व्यापक निंदा और विरोध प्रदर्शन को जन्म दिया है। तुर्की और दक्षिण अफ्रीका सहित कई सरकारों ने इजरायल की कार्रवाई की निंदा की है, जबकि इटली के श्रमिक संघों ने इसके जवाब में आम हड़ताल की मांग की है।

इजरायल ने अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए सुरक्षा चिंताओं और फ्लोटिला के "सक्रिय युद्ध क्षेत्र" में प्रवेश के कारणों का हवाला दिया है। राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन-गविर ने अश्दोद बंदरगाह के दौरे के दौरान कार्यकर्ताओं को "आतंकवादी" बताया।

फ्लोटिला की रोकथाम ने गाजा, मानवीय पहुंच और क्षेत्रीय स्थिरता पर अंतरराष्ट्रीय बहस को तीव्र कर दिया है। इस घटना ने उन देशों के साथ इजरायल के कूटनीतिक संबंधों को भी तनावपूर्ण बना दिया है जिनके नागरिक हिरासत में लिए गए हैं, जिनमें स्विट्जरलैंड भी शामिल है, जिसने इजरायली अधिकारियों द्वारा हिरासत में लिए गए अपने नागरिकों से मिलने वाले स्विस राजनयिकों के दौरे को सीमित करने के बाद कूटनीतिक विरोध दर्ज कराने की योजना बनाई है।

ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला ने कहा है कि उनका मिशन शांतिपूर्ण था और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार मानवीय सहायता पहुंचाने का उद्देश्य था। रोकथाम के बावजूद, समूह ने नाकेबंदी तोड़ने और गाजा के लोगों का समर्थन जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया है।

स्रोत

CBS News

तथ्य जाँच

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Israeli military forces intercepted the Global Sumud Flotilla, a convoy of approximately 40 boats carrying humanitarian aid to Gaza, detaining over 450 international activists, including Swedish climate activist Greta Thunberg.

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The interception occurred on October 2, 2025, with Israeli soldiers boarding the vessels and detaining the activists.

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Footage of the operation has led to widespread condemnation and protests across Europe, Latin America, and Asia.

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Governments including Turkey and South Africa have denounced Israel's actions, while Italian labor unions have called for a general strike in response.

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Israel has defended its actions, citing security concerns and the flotilla's approach to an 'active combat zone.'

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National Security Minister Itamar Ben-Gvir referred to the activists as 'terrorists' during a visit to Ashdod port.

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Unverified

The incident has also strained diplomatic relations between Israel and countries whose citizens were detained, including Switzerland, which has announced plans to file a diplomatic protest after Israeli authorities curtailed a visit by Swiss diplomats to their detained nationals.

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Confirmed

The Global Sumud Flotilla has stated that their mission was peaceful and aimed at delivering humanitarian aid in accordance with international law.

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