नेटन्याहू के संयुक्त राष्ट्र महासभा संबोधन के दौरान राजनयिकों ने किया बहिष्कार
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नेटन्याहू के संयुक्त राष्ट्र महासभा संबोधन के दौरान राजनयिकों ने किया बहिष्कार

सारांश

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेटन्याहू के संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण के दौरान, कई राजनयिकों ने गाजा और लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों के विरोध में सभा छोड़ दी।

26 सितंबर 2025 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेटन्याहू के संबोधन के दौरान, कई राजनयिकों ने विरोध स्वरूप सभा कक्ष छोड़ दिया। यह बहिष्कार गाजा और लेबनान में इजरायल की जारी सैन्य कार्रवाइयों के खिलाफ था, जिन पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई है।

नेटन्याहू का भाषण मुख्य रूप से इजरायल की सुरक्षा चिंताओं पर केंद्रित था, जिसमें उन्होंने विशेष रूप से ईरान और हिज़्बुल्लाह तथा हमास जैसे उग्रवादी समूहों से खतरे को उजागर किया। उन्होंने इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों का बचाव करते हुए कहा, "इजरायल को इस खतरे को खत्म करने और अपने नागरिकों को सुरक्षित घर वापस लाने का पूरा अधिकार है।"

इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कई अरब देशों के प्रतिनिधियों ने किया, जिनमें जॉर्डन, मिस्र और लेबनान शामिल थे, जो फिलिस्तीनियों के प्रति इजरायल के व्यवहार की मुखर आलोचना करते रहे हैं। इस बहिष्कार में दक्षिण अफ्रीका और वेनेजुएला जैसे उन देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए, जो लंबे समय से फिलिस्तीनी अधिकारों के पक्षधर रहे हैं।

नेटन्याहू ने विरोध के बावजूद अपना भाषण जारी रखा और ईरान पर विशेष जोर दिया, जिसे उन्होंने इजरायल के सबसे बड़े खतरे के रूप में वर्णित किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की आलोचना की और इसे इजरायल के प्रति "पक्षपाती" व्यवहार का आरोप लगाया, साथ ही संगठन पर हमास और हिज़्बुल्लाह से इजरायल को होने वाली सुरक्षा चुनौतियों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

यह बहिष्कार वैश्विक मंच पर नेटन्याहू की बढ़ती राजनयिक अलगाव को दर्शाता है। इजरायली नेता अपनी सरकार की नीतियों, विशेष रूप से यहूदी बस्तियों के विस्तार को लेकर, जो कई देशों द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध माना जाता है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बड़े हिस्से के साथ अक्सर विवाद में रहे हैं।

स्रोत

BBC

तथ्य जाँच

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During Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu's address at the United Nations General Assembly on September 26, 2025, numerous diplomats exited the assembly hall in protest.

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The walkout was a response to Israel's ongoing military operations in Gaza and Lebanon, which have drawn international criticism.

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Netanyahu's speech focused on Israel's security concerns, particularly highlighting threats from Iran and militant groups such as Hezbollah and Hamas.

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He defended Israel's military actions, stating, 'Israel has every right to remove this threat and return our citizens to their homes safely.'

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The protest was led by representatives from several Arab nations, including Jordan, Egypt, and Lebanon, who have been vocally critical of Israel's treatment of Palestinians.

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Unverified

The walkout was also joined by delegates from countries that have long championed Palestinian rights, such as South Africa and Venezuela.

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Confirmed

Netanyahu continued his speech despite the protest, focusing heavily on Iran, which he described as Israel's greatest threat.

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Confirmed

He criticized the UN for what he called its 'biased' treatment of Israel and accused the organization of turning a blind eye to the security challenges Israel faces from Hamas and Hezbollah.

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