यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बीच रूस को ईंधन की कमी का सामना
यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने रूसी तेल सुविधाओं को निशाना बनाया है, जिससे कई रूसी क्षेत्रों में ईंधन की कमी हो गई है। इसके परिणामस्वरूप सरकार ने घरेलू आपूर्ति को स्थिर करने के लिए कदम उठाए हैं।
यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने रूसी तेल अवसंरचना को निशाना बनाया है, जिससे रूस के विभिन्न क्षेत्रों जैसे कि फार ईस्ट, क्रीमिया और नizhny नोवगोरोड में ईंधन की कमी हो गई है। रूसी उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा कि समग्र घरेलू ईंधन आपूर्ति की स्थिति नियंत्रण में है, हालांकि कुछ क्षेत्रों में पेट्रोल की कमी देखी जा रही है।
इन व्यवधानों के जवाब में, रूसी सरकार ने डीजल निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है और पेट्रोलियम निर्यात प्रतिबंधों को वर्ष के अंत तक बढ़ा दिया है ताकि घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा सके। नोवाक ने जोर दिया कि क्षेत्रीय अधिकारी और ऊर्जा मंत्रालय सक्रिय रूप से स्थिति का प्रबंधन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि तेल रिफाइनरियों का निरंतर आधुनिकीकरण निकट भविष्य में ईंधन उत्पादन को स्थिर और बढ़ाने में मदद करेगा। यदि घरेलू आपूर्ति मांग से अधिक हो जाती है तो निर्यात फिर से शुरू हो सकता है।
यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने रूसी तेल रिफाइनरियों और अन्य ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाकर ईंधन की कमी को और बढ़ा दिया है। उदाहरण के लिए, 27 सितंबर को यूक्रेनी लंबी दूरी के ड्रोन ने रूस के चुवाशिया क्षेत्र में एक तेल पंपिंग स्टेशन पर हमला किया, जिससे आग लगी और संचालन बंद हो गया। एक यूक्रेनी सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि यह कार्रवाई यूक्रेन की सुरक्षा सेवा (SBU) के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है, जो रूस के तेल क्षेत्र को निशाना बनाकर आर्थिक प्रतिबंध लगाने का प्रयास कर रही है, क्योंकि माना जाता है कि यह क्षेत्र युद्ध के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय लाभ उत्पन्न करता है।
इन हमलों के कारण रूस के पश्चिमी बंदरगाहों—प्रिमोर्स्क, उस्त-लुगा, और नोवोरॉस्सियस्क—से तेल निर्यात सितंबर में अगस्त की तुलना में 25% बढ़कर 2.5 मिलियन बैरल प्रति दिन हो गया है। यह वृद्धि यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण रूसी रिफाइनरियों में हुए आउटेज के कारण हुई, जिससे निर्यात के लिए अधिक कच्चा तेल उपलब्ध हुआ। प्रमुख निर्यात अवसंरचना को निशाना बनाए जाने के बावजूद, उरल्स, KEBCO, और साइबेरियन लाइट ग्रेड के लोडिंग अगस्त से 500,000 बैरल प्रति दिन बढ़े और प्रारंभिक योजनाओं से 600,000 बैरल प्रति दिन अधिक हो गए।
इस स्थिति का वैश्विक तेल बाजारों पर भी प्रभाव पड़ा है। 2 अक्टूबर, 2025 को तेल की कीमतें तीन लगातार दिनों के नुकसान के बाद वापस उभरीं, जो बाजार में अधिक आपूर्ति की चिंताओं से प्रेरित थी। यह वृद्धि रूस के कच्चे तेल पर कड़े प्रतिबंधों की संभावना से समर्थित थी। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.57% बढ़कर $65.72 प्रति बैरल हो गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.55% बढ़कर $62.12 हो गया। विश्लेषकों ने इसे तकनीकी पुनरुद्धार माना, जो भू-राजनीतिक तनावों और WTI के $60 समर्थन स्तर के आसपास बढ़ती खरीदारी रुचि से प्रभावित था।
एक संबंधित विकास में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने यूक्रेन को रूस के अंदर गहरे स्थित लंबी दूरी की ऊर्जा अवसंरचना लक्ष्यों पर खुफिया जानकारी प्रदान करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य यूक्रेन को रूस के प्रमुख ऊर्जा संसाधनों—जैसे रिफाइनरियां, पाइपलाइन, और पावर प्लांट—को बाधित करने में मदद करना है, ताकि क्रेमलिन की राजस्व धारा कमजोर हो सके जो यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए वित्तपोषण करती है। अमेरिका नाटो सहयोगियों से भी इसी तरह की खुफिया सहायता प्रदान करने का आग्रह कर रहा है।
ये घटनाक्रम रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक दबावों को दर्शाते हैं, जो जारी संघर्षों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं के बीच बढ़ रहे हैं।
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