सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के वैश्विक टैरिफ की वैधता की समीक्षा की
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सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के वैश्विक टैरिफ की वैधता की समीक्षा की

सारांश

सुप्रीम कोर्ट पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ की वैधता का मूल्यांकन कर रहा है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम के तहत राष्ट्रपति की अधिकार सीमा पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ की वैधता का आकलन करने के लिए बैठक की, जो अमेरिकी व्यापार नीति और राष्ट्रपति की अधिकारिता के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ रखता है। विचार-विमर्श का केंद्र यह है कि क्या अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) राष्ट्रपति को बिना कांग्रेस की मंजूरी के ऐसे टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।

कार्यवाही के दौरान, सॉलिसिटर जनरल जॉन सॉयर ने तर्क दिया कि ये टैरिफ राजस्व उत्पन्न करने वाले कर नहीं बल्कि नियामक उपाय हैं, और इसलिए IEEPA के तहत राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। उन्होंने कहा, "हम यह दावा नहीं करते कि यहां कर लगाने की शक्ति का प्रयोग हो रहा है, यह विदेशी वाणिज्य को नियंत्रित करने की शक्ति है। ये नियामक टैरिफ हैं, ये राजस्व बढ़ाने वाले टैरिफ नहीं हैं। यह तथ्य कि ये राजस्व उत्पन्न करते हैं, केवल आकस्मिक है।"

न्यायाधीशों, जिनमें रूढ़िवादी भी शामिल हैं, ने संदेह व्यक्त किया। न्यायमूर्ति एमी कोनी बैरेट ने पूछा, "क्या आप कोड में या इतिहास में किसी अन्य स्थान पर, या किसी अन्य समय पर उस वाक्यांश 'आयात को नियंत्रित करना' को एक साथ टैरिफ अधिकार देने के लिए उपयोग किया गया देख सकते हैं?" मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने कांग्रेस की संवैधानिक भूमिका पर प्रकाश डाला, कहा, "वाहन अमेरिकी नागरिकों पर कर लगाने का है। यह हमेशा से कांग्रेस की मूल शक्ति रही है।"

यह मामला ट्रंप के IEEPA का उपयोग करके कई देशों पर टैरिफ लगाने से उत्पन्न हुआ है, जिसमें व्यापार घाटे और अन्य चिंताओं से संबंधित राष्ट्रीय आपात स्थितियों का हवाला दिया गया था। निचली अदालतों ने पहले निर्णय दिया था कि ये कार्रवाईयां राष्ट्रपति की अधिकारिता से बाहर थीं। एक संघीय अपीलीय अदालत ने पाया कि ट्रंप ने टैरिफ लागू करके अपनी सीमा पार की, जिसके कारण वर्तमान सुप्रीम कोर्ट समीक्षा हो रही है।

ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने चेतावनी दी है कि यदि टैरिफ अवैध घोषित किए जाते हैं, तो अमेरिकी सरकार को उन व्यवसायों को अरबों डॉलर वापस करने पड़ सकते हैं जिन्होंने ये टैरिफ चुकाए हैं। उन्होंने कहा, "हमें लगभग आधे टैरिफ पर रिफंड देना होगा, जो ट्रेजरी के लिए भयंकर होगा।"

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय जून 2026 के अंत से पहले आने की संभावना है, जिसका व्यापार मामलों में कार्यकारी और विधायी शाखाओं के बीच शक्ति संतुलन पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।

स्रोत

abcnews.go.com

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The Supreme Court convened on Wednesday to assess the legality of former President Donald Trump's global tariffs.

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Central to the deliberations is whether the International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) grants the president the authority to impose such tariffs without congressional approval.

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Solicitor General John Sauer contended that the tariffs are regulatory measures, not revenue-generating taxes, and thus fall within the president's purview under IEEPA.

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Justice Amy Coney Barrett inquired, 'Can you point to any other place in the code, or any other time in history where that phrase together, 'regulate importation,' has been used to confer tariff authority?'

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Chief Justice John Roberts highlighted the constitutional role of Congress, noting, 'The vehicle is the imposition of taxes on Americans. That has always been the core power of Congress.'

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The case stems from Trump's use of IEEPA to impose tariffs on numerous countries, citing national emergencies related to trade deficits and other concerns.

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Lower courts have previously ruled that these actions exceeded presidential authority.

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Treasury Secretary Scott Bessent has warned that if the tariffs are deemed unlawful, the U.S. government could be obligated to refund tens of billions of dollars to businesses that have paid them.

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